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पंचांग के 5 अंग: तत्वों का परिचय
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का वास्तविक अर्थ क्या है?
1. वार (सौर दिन)
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का समय। प्रत्येक वार का नाम और स्वामित्व एक विशिष्ट ग्रह के पास होता है (जैसे रविवार = सूर्य, सोमवार = चंद्रमा) और यह उस ग्रह के गुणों को प्रदर्शित करता है।
2. तिथि (चंद्र दिवस)
चंद्रमा का दिन, जो यह दर्शाता है कि चंद्रमा को सूर्य के सापेक्ष 12 डिग्री आगे बढ़ने में कितना समय लगता है। तिथियां 24 घंटे की निश्चित अवधि की नहीं होती हैं; ये किसी भी समय शुरू या समाप्त हो सकती हैं।
3. नक्षत्र (चंद्र नक्षत्र मंडल)
आकाश में स्थित तारों के समूह। पूरे आकाश को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। चंद्रमा अपनी यात्रा के दौरान प्रतिदिन एक नक्षत्र क्षेत्र से गुजरता है, जिससे उस दिन का मानसिक और भावनात्मक माहौल तय होता है।
उदाहरण / टिप:
उदाहरण के लिए, रोहिणी नक्षत्र रचनात्मक और पोषण देने वाला महसूस कराता है, जबकि भरणी नक्षत्र तीव्र और परिवर्तनकारी महसूस कराता है।
4. योग (सूर्य-चंद्र का जोड़)
सूर्य और चंद्रमा के भोग्यांशों का योग। कुल 27 योग होते हैं, जो दिन के आपसी संबंधों, समझौतों और कार्यों की सफलता की संभावना को दर्शाते हैं।
5. करण (आधा तिथि)
एक तिथि का आधा हिस्सा (चंद्रमा का 6 डिग्री चलना)। यह दिन में दो बार बदलता है और बैठकों, व्यापार या यात्रा की सूक्ष्म योजना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।