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चंद्रमा की चाल: तिथि और पक्ष

तिथियां क्यों घटती-बढ़ती हैं और चंद्रमा का चक्र हमारे दिनों को कैसे प्रभावित करता है।

दो पक्ष (शुक्ल और कृष्ण)

एक चंद्र मास को दो भागों में बांटा गया है: 1. शुक्ल पक्ष (उजाला): अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय (यह विकास, उन्नति और नई शुरुआत की ऊर्जा लाता है)। 2. कृष्ण पक्ष (अंधेरा): पूर्णिमा से अमावस्या तक का समय (यह आत्मनिरीक्षण, कार्यों को पूरा करने और ध्यान के लिए अनुकूल है)।

तिथियां क्यों घटती या बढ़ती हैं?

चंद्रमा की गति बदलने के कारण एक तिथि 19 से 26 घंटे तक की हो सकती है। यदि कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय को छूती है, तो वह बढ़ जाती है (वृद्धि)। यदि कोई तिथि एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है, तो वह घट जाती है (क्षय)।

उदाहरण / टिप:

आज की तिथि के समाप्त होने का समय देखें। यदि यह दोपहर में समाप्त हो रही है, तो इसका मतलब है कि उसके बाद अगले चंद्र दिवस की ऊर्जा शुरू हो जाएगी!

अमावस्या बनाम पूर्णिमा

अमावस्या (चंद्रमा का गायब होना) न्यूनतम चंद्र प्रकाश को दर्शाती है, जो विश्राम, ध्यान और पितरों के स्मरण के लिए सर्वश्रेष्ठ है। पूर्णिमा (पूरा चंद्रमा) पूर्ण प्रकाश और ऊर्जा को दर्शाती है, जो उत्सव और सामाजिक कार्यों के लिए अनुकूल है।