आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang / Today Panchang)

Ujjain, Madhya Pradesh के लिए आधिकारिक खगोलीय रिपोर्ट।

विक्रम संवत 2083
शक संवत 1948
चन्द्र राशि: सिंह
सूर्य राशि: कन्या
bedtime
Today's Tithi

त्रयोदशी

कृष्ण पक्ष
|अश्विन माह

समाप्त होता है

10:27 अपराह्र

नक्षत्र

पूर्वा फाल्गुनी

समाप्त होता है 09:28 अपराह्र

योग

शुक्ल

समाप्त होता है 01:03 पूर्वाह्न

करण

गर

समाप्त होता है 10:54 पूर्वाह्न

Next

बव समाप्त होता है 10:54 पूर्वाह्न

वार

गुरुवार (Thursday)

सूर्योदय

06:21 पूर्वाह्न

सूर्यास्त

06:07 अपराह्र

चंद्रोदय

04:55 पूर्वाह्न

चंद्रास्त

04:37 अपराह्र

मुहूर्त

Brahma

04:45 पूर्वाह्न

to 05:33 पूर्वाह्न

Yamaganda

06:21 पूर्वाह्न

to 07:49 पूर्वाह्न

Gulika

09:17 पूर्वाह्न

to 10:46 पूर्वाह्न

Abhijit

11:50 पूर्वाह्न

to 12:38 अपराह्र

Rahu Kaal

01:42 अपराह्र

to 03:11 अपराह्र

दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)
समय अंतरालचौघड़ियागुण
06:21 पूर्वाह्न - 07:49 पूर्वाह्नशुभशुभ
07:49 पूर्वाह्न - 09:17 पूर्वाह्नरोगअशुभ (रोग)
09:17 पूर्वाह्न - 10:46 पूर्वाह्नउद्वेगअशुभ (उद्वेग)
10:46 पूर्वाह्न - 12:14 अपराह्रचरसामान्य
12:14 अपराह्र - 01:42 अपराह्रलाभलाभकारी
01:42 अपराह्र - 03:11 अपराह्रअमृतसर्वोत्तम
03:11 अपराह्र - 04:39 अपराह्रकालअशुभ (काल)
04:39 अपराह्र - 06:07 अपराह्रशुभशुभ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज का पंचांग द्रिक प्रणाली का उपयोग करके निकाला जाता है, जिसमें स्विस एफिमेरिस के समान उच्च-सटीक खगोलीय गणनाएं की जाती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि तिथि, नक्षत्र, योग और करण का समय आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति से मेल खाता है।
हाँ, 'हिंदुस्तान द्वारा हिंदू कैलेंडर' ऐप सभी खगोलीय गणनाएं, पंचांग, मुहूर्त, और जन्म कुंडली निर्माण सीधे आपके मोबाइल फोन पर करता है। इसके लिए किसी भी इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती।
द्रिक पंचांग आज आकाश में दिखने वाले ग्रहों की वास्तविक स्थिति (अयनंश सुधार के साथ) पर आधारित है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन स्थिर सूत्रों पर आधारित है, जिसमें समय के साथ आने वाले खगोलीय अंतरों का सुधार नहीं है, जिससे इसके समय में घंटों या दिनों का अंतर आ गया है।
वैदिक ज्योतिष में, सौर दिन (वार) सूर्योदय के पहले घंटे के स्वामी ग्रह (होरा स्वामी) द्वारा निर्धारित होता है। सूर्योदय के समय की तिथि ही दिन को नाम देती है। इसलिए, स्थानीय सूर्योदय पर दिन बदलता है, जिससे कैलेंडर कृत्रिम समय के बजाय प्राकृतिक सौर चक्र से जुड़ा रहता है।
अंतर केवल इतना है कि चंद्र महीना कब समाप्त होता है। अमांत प्रणाली में महीना अमावस्या (New Moon) पर समाप्त होता है, जबकि पूर्णिमांत प्रणाली में यह पूर्णिमा (Full Moon) पर समाप्त होता है। दोनों प्रणालियों में त्यौहार और शुभ तिथियां बिल्कुल एक ही दिन आती हैं।
राहु एक छाया ग्रह है जो भ्रम, बाधाओं और भौतिक लालसा का प्रतिनिधित्व करता है। दिन के 8 भागों में से एक भाग का स्वामी राहु होता है (जिसे राहु काल कहते हैं)। इस समय नए काम शुरू करने या शुभ अनुष्ठान करने से बाधाएं आने की संभावना रहती है।
ब्रह्म मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय से ठीक 96 मिनट (2 घड़ी) पहले शुरू होता है और 48 मिनट तक रहता है। इसका सूत्र है: ब्रह्म मुहूर्त प्रारंभ = स्थानीय सूर्योदय - 96 मिनट। चूंकि सूर्योदय का समय प्रतिदिन बदलता है, इसलिए इसकी गणना स्थान के अक्षांश और देशांतर के आधार पर की जाती है।
पंचांग के पांच अंग हैं: तिथि (सूर्य-चंद्रमा की कोणीय दूरी), वार (सौर दिन), नक्षत्र (चंद्रमा की तारा मंडल में स्थिति), योग (सूर्य-चंद्रमा का योग), और करण (आधा-तिथि)। ये पांच अंग मिलकर किसी भी दिन के शुभ और अशुभ प्रभाव का निर्धारण करते हैं।
प्रत्येक नक्षत्र को 4 बराबर भागों में बांटा गया है जिन्हें 'चरण' या 'पद' कहते हैं। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र चरण में होता है, उसी के अनुसार बच्चे के नाम का पहला अक्षर (शुभ अक्षर) निकाला जाता है, जिसे नामकरण पद्धति कहते हैं।
हमारा ऐप आपके डिवाइस के स्थानीय जीपीएस निर्देशांकों का उपयोग करके ऑफ़लाइन ग्रहों की स्थिति की गणना करता है। हम गणना में यूटीसी और स्थानीय समय की सीधी तुलना से बचते हैं, जिससे टाइमजोन शिफ्ट बग खत्म हो जाता है और सही समय हाइलाइट होता है।
दृश्य गणित एवं खगोल विज्ञान

वैदिक काल-गणना: दृश्य पंचांग, पाँच अंग एवं खगोलीय सिद्धांत

वैदिक पंचांग केवल एक पारंपरिक कैलेंडर नहीं, अपितु सूर्य और चंद्रमा की सटीक कोणीय स्थिति पर आधारित एक परिष्कृत खगोलीय विज्ञान है। TodayPanchang.in पर प्रत्येक गणना आपके स्थानीय अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई के आधार पर दृश्य गणित (Drik Ganita) प्रणाली से सुव्यवस्थित की जाती है।

account_treeपंचांग के पाँच मूल अंग (The 5 Fundamental Limbs)

१. तिथि (Tithi) — चंद्र दिवस

सूर्य और चंद्रमा के बीच प्रत्येक १२° के कोणीय अंतर को एक तिथि कहा जाता है। शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तथा कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक कुल ३० तिथियां होती हैं।

२. नक्षत्र (Nakshatra) — चंद्र मार्ग

क्रांतिवृत्त को २७ समान भागों (प्रत्येक १३° २०') में विभाजित किया गया है। चंद्रमा जिस तारामंडल में गोचर करता है, वही उस समय का नक्षत्र कहलाता है।

३. योग (Yoga) — संयुक्त रेखांश

सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों के योग को १३° २०' से विभाजित करने पर २७ योग प्राप्त होते हैं (जैसे विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, आदि)।

४. करण (Karana) — आधा चंद्र दिवस

एक तिथि के आधे भाग (६° कोणीय अंतर) को करण कहते हैं। कुल ११ करण होते हैं (७ चर और ४ स्थिर), जो कर्मों की सफलता का निर्धारण करते हैं।

५. वार (Vara) — सौर्य दिवस

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का काल एक वार कहलाता है, जिसका आधिपत्य उस दिन के प्रमुख ग्रह स्वामी (होरा स्वामी) के पास होता है।

उदया तिथि का नियम

धार्मिक व्रतों व त्योहारों में वही तिथि मान्य होती है जो सूर्योदय के समय उपस्थित हो। यह नियम स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है।

pin_dropस्थानीय सूर्योदय और अक्षांशीय सटीकता

भारत और विश्व के विभिन्न नगरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात के सूर्योदय में लगभग २ घंटे का अंतर होता है। इसलिए एक ही दिन अलग-अलग शहरों में चौघड़िया, राहुकाल और शुभ मुहूर्त का समय भिन्न होता है।

tuneपूर्णिमान्त एवं अमान्त परंपराएं

उत्तर भारतीय परंपरा में माह का अंत पूर्णिमा पर होता है (पूर्णिमान्त), जबकि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में माह का अंत अमावस्या पर होता है (अमान्त)। दोनों पद्धतियों में शुक्ल पक्ष की तिथियां समान रहती हैं।

खगोलीय संदर्भ एवं प्रामाणिकता

TodayPanchang.in की गणनाएं शास्त्रीय ग्रंथों (सूर्य सिद्धान्त, मुहूर्त चिन्तामणि, बृहत्संहिता) तथा आधुनिक परिशुद्ध खगोलीय अल्गोरिद्म (Drik Ganita) के समन्वय पर आधारित हैं।