वैदिक काल-गणना: दृश्य पंचांग, पाँच अंग एवं खगोलीय सिद्धांत
वैदिक पंचांग केवल एक पारंपरिक कैलेंडर नहीं, अपितु सूर्य और चंद्रमा की सटीक कोणीय स्थिति पर आधारित एक परिष्कृत खगोलीय विज्ञान है। TodayPanchang.in पर प्रत्येक गणना आपके स्थानीय अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई के आधार पर दृश्य गणित (Drik Ganita) प्रणाली से सुव्यवस्थित की जाती है।
account_treeपंचांग के पाँच मूल अंग (The 5 Fundamental Limbs)
१. तिथि (Tithi) — चंद्र दिवस
सूर्य और चंद्रमा के बीच प्रत्येक १२° के कोणीय अंतर को एक तिथि कहा जाता है। शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तथा कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक कुल ३० तिथियां होती हैं।
२. नक्षत्र (Nakshatra) — चंद्र मार्ग
क्रांतिवृत्त को २७ समान भागों (प्रत्येक १३° २०') में विभाजित किया गया है। चंद्रमा जिस तारामंडल में गोचर करता है, वही उस समय का नक्षत्र कहलाता है।
३. योग (Yoga) — संयुक्त रेखांश
सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों के योग को १३° २०' से विभाजित करने पर २७ योग प्राप्त होते हैं (जैसे विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, आदि)।
४. करण (Karana) — आधा चंद्र दिवस
एक तिथि के आधे भाग (६° कोणीय अंतर) को करण कहते हैं। कुल ११ करण होते हैं (७ चर और ४ स्थिर), जो कर्मों की सफलता का निर्धारण करते हैं।
५. वार (Vara) — सौर्य दिवस
स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का काल एक वार कहलाता है, जिसका आधिपत्य उस दिन के प्रमुख ग्रह स्वामी (होरा स्वामी) के पास होता है।
उदया तिथि का नियम
धार्मिक व्रतों व त्योहारों में वही तिथि मान्य होती है जो सूर्योदय के समय उपस्थित हो। यह नियम स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है।
pin_dropस्थानीय सूर्योदय और अक्षांशीय सटीकता
भारत और विश्व के विभिन्न नगरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात के सूर्योदय में लगभग २ घंटे का अंतर होता है। इसलिए एक ही दिन अलग-अलग शहरों में चौघड़िया, राहुकाल और शुभ मुहूर्त का समय भिन्न होता है।
tuneपूर्णिमान्त एवं अमान्त परंपराएं
उत्तर भारतीय परंपरा में माह का अंत पूर्णिमा पर होता है (पूर्णिमान्त), जबकि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में माह का अंत अमावस्या पर होता है (अमान्त)। दोनों पद्धतियों में शुक्ल पक्ष की तिथियां समान रहती हैं।
खगोलीय संदर्भ एवं प्रामाणिकता
TodayPanchang.in की गणनाएं शास्त्रीय ग्रंथों (सूर्य सिद्धान्त, मुहूर्त चिन्तामणि, बृहत्संहिता) तथा आधुनिक परिशुद्ध खगोलीय अल्गोरिद्म (Drik Ganita) के समन्वय पर आधारित हैं।