वैदिक मार्गदर्शिका

अमांत बनाम पूर्णिमांत कैलेंडर प्रणाली: क्षेत्रीय परंपराओं की व्याख्या

Ramesh Sao
5 मिनट

भारत का कैलेंडर लूनी-सोलर (Luni-Solar) है, जिसका अर्थ है कि यह चंद्रमा के चरणों (महीने के लिए) और सूर्य के राशि परिवर्तन (वर्ष के लिए) दोनों को ट्रैक करता है। भारत में चंद्र मास की शुरुआत और अंत को परिभाषित करने वाली दो प्रमुख परंपराएं हैं: अमांत और पूर्णिमांत प्रणाली।

यद्यपि इनके महीने के नाम और शुरुआत की तारीखें अलग दिखती हैं, लेकिन दोनों प्रणालियां बिल्कुल समान खगोलीय गणनाओं पर आधारित हैं। ये एक ही चंद्र चक्र को नाम देने के दो अलग तरीके हैं।

अमांत प्रणाली (अमावस्या पर अंत)

अमांत प्रणाली (अमावस्या-अंत) में चंद्र मास अमावस्या को समाप्त होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच की कोणीय दूरी 0° होती है। नया महीना अगले दिन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शुरू होता है। यह प्रणाली दक्षिण भारतीय राज्यों (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु) और पश्चिमी राज्यों (महाराष्ट्र, गुजरात) में अपनाई जाती है।

इस महीने का नाम उस राशि (संक्रांति) पर रखा जाता है जिसमें अमावस्या आती है।

पूर्णिमांत प्रणाली (पूर्णिमा पर अंत)

पूर्णिमांत प्रणाली (पूर्णिमा-अंत) में चंद्र मास पूर्णिमा को समाप्त होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरी ठीक 180° होती है। नया महीना अगले दिन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से शुरू होता है। यह परंपरा उत्तर भारतीय राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में अपनाई जाती है।

चूंकि महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है, इसलिए पूर्णिमांत महीना अमांत महीने से 15 दिन पहले शुरू हो जाता है। पूर्णिमांत में महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष (अंधेरे पखवाड़े) से होती है, जबकि अमांत में शुक्ल पक्ष से होती है।

त्योहारों का समान दिनों पर आना

दोनों प्रणालियों में पक्ष (Paksha) बिल्कुल समान होते हैं। किसी महीने का शुक्ल पक्ष (उजला पखवाड़ा) दोनों कैलेंडर में समान नाम और तारीखों का होता है। कृष्ण पक्ष (अंधेरा पखवाड़ा) बस अलग महीने के नाम के अंतर्गत आता है। पूर्णिमांत महीने का कृष्ण पक्ष, पिछले अमांत महीने के कृष्ण पक्ष के समान होता है।

उदाहरण के लिए, कृष्ण जन्माष्टमी हमेशा कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। पूर्णिमांत में यह भाद्रपद महीने में आती है, और अमांत में यह श्रावण महीने में आती है। दोनों प्रणालियाँ आकाश में एक ही दिन की ओर इशारा करती हैं। अतः त्योहारों की गणना में कोई अंतर नहीं होता, वे गणितीय रूप से समान हैं।

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चर्चा (2 टिप्पणियां)

करण जौहर

यह इस बात का सबसे अच्छा स्पष्टीकरण है कि दोनों कैलेंडर में जन्माष्टमी एक ही दिन क्यों आती है। यह केवल महीने के नाम का अंतर है!

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Ramesh Saoलेखक

जी हाँ, पूर्णिमांत का भाद्रपद कृष्ण पक्ष और अमांत का श्रावण कृष्ण पक्ष बिल्कुल एक ही पखवाड़ा होते हैं।

दीपक गुप्ता

क्या दोनों प्रणालियों में एकादशी व्रत की गणना में कोई अंतर होता है?

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Ramesh Saoलेखक

बिल्कुल नहीं। एकादशी की गणना सूर्य-चंद्रमा के कोणीय अंतर पर आधारित होती है, जो पूरी दुनिया के लिए समान होती है।

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